भारत में बेरोज़गारी दर में गिरावट: 2023-24 में 3.2% तक पहुंची सामान्य स्थिति पर बेरोज़गारी

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रोज़गार और बेरोज़गारी पर आधिकारिक आँकड़े आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के माध्यम से एकत्र किए जाते हैं, जिसे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा 2017-18 से आयोजित किया जा रहा है। नवीनतम उपलब्ध वार्षिक पीएलएफएस रिपोर्टों के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति पर अनुमानित बेरोज़गारी दर 2017-18 में 6.0% से घटकर 2023-24 में 3.2% हो गई है।

इसके अतिरिक्त, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने जनवरी 2025 से पीएलएफएस में सुधार किए हैं। मासिक पीएलएफएस रिपोर्टों के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए वर्तमान साप्ताहिक स्थिति पर बेरोज़गारी दर  अगस्त 2025 में 5.1% और सितंबर 2025 में 5.2% थी। इसी अवधि के दौरान, ग्रामीण बेरोज़गारी क्रमशः 4.3% और 4.6% थी, और शहरी बेरोज़गारी क्रमशः 6.7% और 6.8% थी। बढ़ी हुई आवृत्ति और मौसमी परिवर्तनों के कारण मासिक पीएलएफएस अनुपातों में परिवर्तन अपेक्षित हैं, लेकिन ये आवश्यक रूप से दीर्घकालिक प्रवृत्तियों को नहीं दर्शाते हैं।

हालांकि, महाराष्ट्र में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति पर अनुमानित बेरोज़गारी दर  2017-18 में 4.8% से घटकर 2023-24 में 3.3% हो गई है। साथ ही, महाराष्ट्र में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए सामान्य स्थिति पर ग्रामीण क्षेत्रों में 2017-18 में बेरोज़गारी दर  3.2% से घटकर 2023-24 में 2.1% हो गई है। शहरी क्षेत्रों में इसी अवधि के दौरान 7.4% से घटकर 5.2% हो गई है।

रोज़गार सृजन के साथ-साथ रोज़गार क्षमता में सुधार करना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार देश भर में, महाराष्ट्र सहित, सभी (ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों सहित) की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न रोज़गार सृजन योजनाओं/कार्यक्रमों को लागू कर रही है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस), उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), ग्रामीण स्वरोजगार और प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई), दीन दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (डीएवाई- एनयूएलएम), पीएम स्ट्रीट वेंडर की आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि), स्टैंड-अप इंडिया स्कीम, स्टार्ट अप इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कृत्रिम मेधा (एआई) सहित 10 नए/उभरती प्रौद्योगिकियों में रोज़गार क्षमता के लिए आईटी जनशक्ति के पुनर्कौशल/कौशल उन्नयन के लिए ‘फ्यूचरस्किल्स प्राइम’ नामक एक कार्यक्रम शुरू किया है।

महिला श्रमिकों की रोज़गार क्षमता बढ़ाने के लिए, सरकार उन्हें महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों और क्षेत्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान कर रही है।

एआईसीटीई भी मेधावी महिला इंजीनियरिंग छात्रों को ‘प्रगति’ और ‘सरस्वती’ जैसी छात्रवृत्तियाँ प्रदान करता है। इससे इन विषयों में महिलाओं के लिए एक सहायक वातावरण को बढ़ावा मिलता है। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने अप्रैल 2025 में ‘महिलाओं के लिए एआई करियर पहल’  भी शुरू की है। इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस दो वर्षों की अवधि में लड़कियों के लिए प्रशिक्षण और आर्थिक अवसर बढ़ाना है। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय ने अप्रैल 2025 में ‘महिलाओं के लिए एआई करियर पहल’  भी शुरू की है। इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस दो वर्षों की अवधि में लड़कियों के लिए प्रशिक्षण और आर्थिक अवसर बढ़ाना है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मिशन शक्ति के तहत ‘पालना’ का घटक लागू कर रहा है, जिसके अंतर्गत दिन में बच्चों की देखभाल की सुविधाएँ  प्रदान करना और बच्चों की सुरक्षा मुख्य फोकस क्षेत्र है। ‘पालना’ के तहत, आंगनवाड़ी और क्रेश  के माध्यम से बच्चों की देखभाल की मुफ्त सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।

सरकार ने “नव्या”  नाम की एक योजना भी शुरू की है, जिसका उद्देश्य 16 से 18 वर्ष की किशोरियों को मुख्य रूप से गैर-पारंपरिक और रोजगार में उभरती भूमिकाओं में व्यावसायिक प्रशिक्षण से लैस करना है।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने विनिर्माण क्षेत्र  पर विशेष ध्यान देने के साथ, सभी क्षेत्रों में रोज़गार सृजन, रोज़गार क्षमता और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा  देने के लिए प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना नामक रोज़गार-संबद्ध प्रोत्साहन योजना लागू की है। इस योजना का परिव्यय 99,446 करोड़ रुपये  है और इसका लक्ष्य 2 वर्षों की अवधि में देश में 3.5 करोड़ से अधिक रोज़गारों के सृजन को प्रोत्साहित करना है।

इसके अलावा, भारत सरकार का श्रम और रोज़गार मंत्रालय राष्ट्रीय करियर सेवा पोर्टल का संचालन कर रहा है। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो एक ही जगह करियर  संबंधी जानकारी  प्रदान करता है। इसमें  निजी  और सरकारी क्षेत्र की नौकरियों, ऑनलाइन और ऑफलाइन जॉब फेयर की जानकारी, रोजगार ढूँढना और मिलाना, करियर काउंसलिंग, व्यवसायिक मार्गदर्शन, कौशल विकास कोर्स, स्किल/ट्रेनिंग प्रोग्राम वगैरह की जानकारी सहित करियर से जुड़ी जानकारी होती  है। www.ncs.gov.in

श्रम और रोज़गार मंत्रालय, रोज़गार बाज़ार की माँगों को पूरा करने के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के रोज़गार चाहने वालों की रोज़गार क्षमता को बढ़ाने हेतु देश भर में 25 राष्ट्रीय करियर सेवा केंद्रों के नेटवर्क के माध्यम से “वेलफेयर ऑफ़ एससी/एसटी जॉबसीकर योजना” भी लागू कर रहा है।

इसके अतिरिक्त, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने 2020-21 में प्रधानमंत्री – दक्षता और कुशलता संपन्न हितग्राही योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति, ओबीसी, आर्थिक रूप से कमजोर और सफाई कर्मचारी (कचरा बीनने वाले सहित) को सूचीबद्ध  प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। इस पहल का लक्ष्य उन्हें वेतन-रोज़गार और स्वरोज़गार दोनों में रोज़गार योग्य बनाना है।

महिला श्रमिकों के लिए समान अवसर  और अनुकूल कार्य वातावरण सुनिश्चित करने हेतु श्रम कानूनों में कई सुरक्षात्मक प्रावधानों को शामिल किया गया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 26 सप्ताह के सवेतन मातृत्व अवकाश का प्रावधान और ऐसे प्रतिष्ठानों में  जहाँ 50 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं वहां अनिवार्य क्रेश सुविधा का प्रावधान किया गया है।

इसके अलावा, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020 में यह प्रावधान है कि महिलाओं को सभी प्रकार के कार्यों के लिए सभी प्रतिष्ठानों  में रोज़गार पाने का अधिकार होगा। उन्हें उनकी सहमति से  सुबह 6 बजे से पहले और शाम 7 बजे के बाद भी काम करवाया जा सकता है बशर्ते जहाँ सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षा, छुट्टियों और कार्य के घंटों से संबंधित नियमों का पालन किया गया हो, या कोई अन्य शर्तें जिनका नियोक्ता  द्वारा पालन किया जाना आवश्यक हो।

केंद्रीय बजट (2024-25) में  उद्योग के सहयोग से महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कार्यकारी महिला छात्रावास स्थापित करने और क्रेश स्थापित करने की घोषणा की गई।

यह जानकारी आज श्रम और रोज़गार राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे द्वारा लोकसभा  में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई।

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