विकसित भारत-जी राम जी कानून 2025

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ग्रामीण रोज़गार लगभग दो दशकों से भारत की सामाजिक सुरक्षा संरचना की आधारशिला रही है। 2005 में कार्यान्वित होने के बाद से, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ने मज़दूरी वाला रोजगार प्रदान करने, ग्रामीण आय को स्थिर करने और मूलभूत अवसंरचना निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, समय के साथ, ग्रामीण भारत की संरचना और लक्ष्य अत्‍यधिक बदल गए हैं। बढ़ती आय, बढ़ी हुई कनेक्टिविटी, व्यापक स्तर पर डिजिटल पहुंच और अलग-अलग तरह की आजीविका ने ग्रामीण रोज़गार की आवश्यकताओं की प्रकृति बदल दी है।

इस पृष्ठभूमि में, भारत के राष्ट्रपति द्वारा विकसित भारत–गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह कानून मनरेगा में व्यापक वैधानिक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो ग्रामीण रोज़गार को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक विजन के साथ संयोजित करता है तथा जवाबदेही, बुनियादी ढांचे के परिणामों और आय सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।

भारत में ग्रामीण रोजगार और विकास नीति की पृष्ठभूमि

स्वतंत्रता के बाद से, भारत में ग्रामीण विकास की नीतियों का केंद्रबिन्दु निर्धनता कम करने, खेती की पैदावार को बेहतर बनाने और अधिशेष तथा कम काम वाले ग्रामीण मज़दूरों के लिए रोजगार सृजन रहा है। मजदूरी वाले रोजगार कार्यक्रम धीरे-धीरे ग्रामीण रोजगार की सहायता करने के मुख्य माध्यम बन गए हैं, साथ ही इसने मूलभूत अवसंरचना को भी सुदृढ़ किया है। समय के साथ बदलते सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के अनुरूप दृष्टिकोणों में भी बदलाव आया है।

ग्रामीण श्रमबल कार्यक्रम (1960 का दशकऔर ग्रामीण रोजगार के लिए क्रैश स्कीम (1971) जैसे आरम्भिक कार्यक्रमों के साथभारत के मजदूरी रोजगार पहलों की विविध चरणों के माध्यम से प्रगति हुई। इनके बाद 1980 और 1990 के दशक में अधिक संरचित प्रयास किए गए, जिसमें राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमग्रामीण भूमिहीन रोजगार गारंटी कार्यक्रम शामिल था, जिसे बाद में जवाहर रोजगार योजना (1993) में विलय कर दिया गया। 1999 में यह सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना में संघटित हो गईजिसका उद्देश्य कवरेज और समन्वय में सुधार करना था। रोजगार आश्वासन योजना और काम के बदले अनाज कार्यक्रम जैसी पूरक योजनाओं ने मौसमी बेरोजगारी और खाद्य सुरक्षा पर ध्यान दिया। 1977 के महाराष्ट्र रोजगार गारंटी अधिनियम के साथ एक बड़ा बदलाव आया, जिसने काम करने के वैधानिक अधिकार की अवधारणा प्रस्तुत की। इन अनुभवों की परिणति 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीएके अधिनियमन में हुई।

मनरेगा का विकास और वृद्धिशील सुधार की सीमाएं

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगाएक प्रमुख कार्यक्रम था जिसका लक्ष्य बिना कौशल वाले काम करने को तैयार गांव के परिवारों को प्रति वर्ष कम से कम 100 दिन की गारंटी वाला काम देकर रोजी-रोटी की सुरक्षा बढ़ाना था। पिछले कुछ वर्षों में, कई प्रशासनिक और प्राद्यौगिक सुधारों ने इसके कार्यान्वयन को सुदृढ़ किया, जिससे सहभागिता, पारदर्शिता और डिजिटल शासन में अत्‍यधिक सुधार हुआ। वित्‍त वर्ष 2013-14 और वित्‍त वर्ष 2025-26 के बीच महिलाओं की सहभागिता 48 प्रतिशत से धीरेधीरे बढ़कर 58.15 प्रतिशत हो गई, आधार सीडिंग में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई, आधार-बेस्ड पेमेंट सिस्टम को व्‍यापक स्‍तर पर अपनाया गया और इलेक्ट्रॉनिक वेतन पेमेंट लगभग हर जगह प्रचलित हो गया। कामों की निगरानी में भी सुधार हुआ, जियो-टैग्ड एसेट्स में व्‍यापक स्‍तर पर बढ़ोतरी हुई और घरेलू स्‍तर पर सृजित अलग-अलग परिसंपत्तियों का हिस्सा बढ़ा।

मनरेगा के तहत प्राप्‍त अनुभव ने प्रक्षेत्र-स्‍तरीय कर्मचारियों की अहम भूमिका को भी रेखांकित किया, जिन्होंने कम प्रशासनिक संसाधनों और कर्मचारियों के साथ काम करने के बावजूद निरंतरता और कर्यान्‍वयन का परिमाण सुनिश्चित किया। यद्पि, इन लाभों के साथ-साथ, गहरे संरचनागत मुद्दे भी बने ही रहे। कई राज्यों में निगरानी से पता चला कि जमीनी स्‍तर पर काम प्राप्‍त नहीं हो रहा था, व्‍यय वास्‍तविक प्रगति से मेल नहीं खा रहा था, श्रम केन्द्रित कार्यों में मशीनों का इस्तेमाल हो रहा था और डिजिटल उपस्थितिप्रणाली का बार-बार उल्‍लंघन किया जा रहा था। समय के साथ, गलत इस्तेमाल बढ़ता गया और महामारी के बाद के समय में केवल कुछ ही परिवार पूरे सौ दिन का काम पूरा कर पाए। इन रुझानों से पता चला कि डिलीवरी प्रणाली में तो सुधार हुआ, लेकिन मनरेगा का पूरा ढांचा लगभग चरमरा चुका था।

रोजगार के लिए विकसित भारत गारंटी और आजीविका मिशन ग्रामीण कानून ने एक व्‍यापक कानूनी बदलाव के जरिए इस अनुभव पर ध्‍यान दिया है। यह प्रशासनिक व्‍यय की सीमा को प्रतिशत से बढ़ाकर प्रतिशत करने के जरिए कार्यान्‍वयन संरचना को सुदृढ़ करता हैजिससे कर्मचारियों की भर्ती करनेपारिश्रमिक प्रदान करनेप्रशिक्षण और तकनीकी क्षमता के लिए पर्याप्‍त मदद मिलती है। यह बदलाव प्रोग्राम मैनेजमेंट के लिए एक व्‍यावहारिक और लोक-केंद्रित दृष्टिकोण प्रदर्शित करता है, जो अधिक पेशेवर और उपयुक्‍त सपोर्ट वाले सिस्टम की ओर बढ़ रहा है। मजबूत प्रशासनिक क्षमता से योजना निर्माण और काम करने में सुधार, सेवा वितरण में बढ़ोतरी और जवाबदेही में सुदृढ़ता आने की उम्‍मीद है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि नई संरचना के लक्ष्य ग्रामीण स्‍तर पर निरंतर पूरे होते रहें।

नए वैधानिक ढांचे का औचित्‍य

सुधार की आवश्‍यकता बड़े सामाजिक-आर्थिक बदलावों में भी निहित है। मनरेगा 2005 में कार्यान्वित किया गया था, लेकिन ग्रामीण भारत अब रूपांतरित हो रहा है। 2011-12 में निर्धनता का स्‍तर 27.1 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 5.3 प्रतिशत हो गया, जिसे बढ़ते उपभोग, बेहतर वित्‍तीय सुविधा और बढ़े हुए कल्‍याणकारी कवरेज से सहायता मिली। ग्रामीण आजीविका के अधिक विविधीकृत होने और डिजिटली तरीके से समेकित होने के साथ, मनरेगा की व्‍यापक और मांग आधारित संरचना अब आज के गांव की वास्‍तविकता से पूरी तरह मेल नहीं खाती।

विकसितभारत– जी राम जी कानून 2025इस संदर्भ का प्रत्‍युत्‍तर ग्रामीण रोजगार गारंटी को आधुनिक बनाने, जवाबदेही को सुदृढ़ करने और रोजगार सृजन को दीर्घावधि अवसंरचना और जलवायु अनुकूलता लक्ष्यों के साथ जोड़कर देता है।

विकसित भारतजी राम जी कानून2025 की मुख्य विशेषताएं

यह कानून प्रत्‍येक वित्‍तीय वर्ष में ऐसे ग्रामीण परिवारों को, जिनके वयस्‍क सदस्‍य स्‍वेच्‍छा से बिना कौशल वाले काम के लिए तैयार हैं, 125 दिन की मजदूरी वाले रोजगार की गारंटी देता है। इससे पहले के 100 दिन की पात्रता से अधिक दिनों की आय सुरक्षा में मदद मिलेगी। साथ ही, बुवाई और कटाई के व्‍यस्‍त सीज़न में खेती में काम करने वाले मजदूरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कुल 60 दिन का नोवर्क पीरियड होगा। शेष 305 दिनों में भी मजदूरों को 125 दिन की गारंटी वाला रोजगार प्राप्‍त होता रहेगा, जिससे किसानों और मजदूरों दोनों लाभान्वित होंगे। दैनिक मज़दूरी हर सप्‍ताह या किसी भी स्थिति मेंकाम करने की तिथि के 15 दिन के भीतर ही वितरित कर दी जाएगी। रोजगार सृजन को चार प्राथमिकता वाले कार्य-क्षेत्रों के माध्‍यम से अवसंरचना विकास के साथ जोड़ा गया है:

  • जलसंबंधी कार्यों के माध्यम से जल सुरक्षा
  • मुख्यग्रामीण अवसंरचना
  • आजीविका से संबंधित बुनियादी ढांचा
  • मौसम में बदलाव के असर को कम करने के लिए विशेष कार्य

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