ब्रिक्स महासागर और ध्रुवीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कार्य समूह की 8वीं बैठक

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) ने 12-14 अगस्त, 2026 तक गोवा में राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) द्वारा आयोजित ‘महासागर और ध्रुवीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी’ (ओपीएसटी) पर ब्रिक्स कार्य समूह की 8वीं बैठक का आयोजन किया। ब्रिक्स ओपीएसटी कार्य समूह की स्थापना के बाद से ये गतिविधियां ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) सहयोग गतिविधियों के ढांचे के तहत भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के समन्वय में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इस बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और प्रतिनिधि एकत्रित हुए और उन्होंने पारस्परिक हित के क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया तथा महासागर एवं ध्रुवीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग को और मजबूत किया। इस बैठक का उद्घाटन 12 अगस्त को एनसीपीओआर के निदेशक डॉ. थंबन मेलोथ ने किया और एट्रिया विश्वविद्यालय के कुलपति और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. माधवन नायर राजीव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। तीन दिवसीय इस कार्यक्रम की अध्यक्षता एनसीपीओआर, गोवा के निदेशक ने की और इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधिकारी और वैज्ञानिक शामिल थे, जिसका नेतृत्व वैज्ञानिक ‘जी’ और सलाहकार, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस), डॉ. संदीप कुमार मुखोपाध्याय ने किया।

इस कार्य समूह की बैठक ने महासागर और ध्रुवीय अनुसंधान के क्षेत्र में ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और सहयोगात्मक अनुसंधान गतिविधियों के विकास पर विचार-विमर्श और चर्चा के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया। विचार-विमर्श ब्रिक्स देशों के मुद्दों और अवसरों पर केंद्रित था, जैसे तटीय क्षेत्रों की चुनौतियां, विशेष रूप से तटीय शहरों की सुरक्षा पर जोर, मजबूत और सुदृढ़शील महासागरीय सूचना सेवाओं के विकास के लिए सहयोगात्मक योगदान के माध्यम से वैश्विक महासागर अवलोकन प्रणाली (जीओओएस) को मजबूत करना, संयुक्त ध्रुवीय अनुसंधान का विकास और अंटार्कटिक अभियान में समावेशी भागीदारी, विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं के लिए क्षमता निर्माण के बेहतर अवसर। बैठक के दौरान ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने तटीय सुदृढ़शीलता बढ़ाने, संयुक्त ध्रुवीय महासागरीय जैव विविधता का अध्ययन करने, अंतर्राष्ट्रीय ध्रुवीय वर्ष – 5 के लिए महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित करने और युवा शोधकर्ताओं की क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सहयोगात्मक पहल पर संयुक्त रूप से सहमति व्यक्त की। ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भारत कार्य समूह के लिए रोडमैप के विकास पर चल रहे कार्य को अंतिम रूप देने के लिए समन्वय करेगा, जिसमें इसके अल्पकालिक कार्यान्वयन के लिए कार्य योजना भी शामिल है।

भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार तुम्मला ने वर्चुअल माध्यम से आयोजित ब्रिक्स-ओपीएसटी की 8वीं बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए गोवा में हुई तीन दिवसीय बैठक में हुई सार्थक चर्चाओं और परिणामों के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस बैठक ने महासागर और ध्रुवीय विज्ञान में वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया है। सचिव महोदय ने प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर बनी सहमति पर संतोष व्यक्त किया और सदस्य देशों को बैठक के परिणामों को ठोस सहयोगात्मक कार्यों में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसमें संयुक्त अनुसंधान पहल, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों का आदान-प्रदान, अनुसंधान अवसंरचना का साझाकरण और संस्थागत संबंधों को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस बैठक की सिफारिशें और परिणाम महासागर और ध्रुवीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ब्रिक्स सहयोग को और मजबूत करेंगे। बैठक का समापन सहयोगात्मक प्रयासों और मजबूत साझेदारियों के माध्यम से महासागर और ध्रुवीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के लिए ब्रिक्स देशों की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए हुआ।

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