नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने एक बयान में बताया कि गुरुवार को तिब्बत में 7.0 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप भारतीय समयानुसार रात लगभग 8:03 बजे आया और इसका केंद्र 173 किमी की गहराई पर था। चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर (CENC) ने पुष्टि की कि यह भूकंप उत्तरी तिब्बत के नागकू (Nagqu) इलाके में स्थानीय समयानुसार रात लगभग 10:33 बजे (1433 GMT) आया। CENC के आंकड़ों के अनुसार, भूकंप का केंद्र 10 किमी की गहराई पर था।
इस इलाके में भीषण बाढ़ आने के कुछ हफ्तों बाद ही यह भूकंप आया
गौरतलब है कि इस इलाके में भीषण बाढ़ आने के कुछ हफ्तों बाद ही यह भूकंप आया है, जिससे हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। फिलहाल, गुरुवार को आए इस भूकंप से किसी के हताहत होने या किसी तरह के नुकसान की कोई तत्काल जानकारी नहीं मिली है।
इससे पहले, 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने (avalanche) से भीषण बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ में कई घर, सड़कें और पुल बह गए, जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं और हजारों लोग लापता हो गए।
नेपाल-तिब्बत में आई इस विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,243 हो गई है। बचावकर्मी बारिश और मलबे के बीच उन लोगों की तलाश कर रहे हैं, जिनके भोतेकोशी नदी के किनारे बनी सुरंगों और हिमालयी देश के भूमिगत पावर हाउसों में फंसे होने की आशंका है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि इस आपदा का जलवायु परिवर्तन से संबंध होने के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से उठाया जाना चाहिए। वहीं, पिछले हफ्ते आई बाढ़ के बाद लापता हुए लोगों के परिवारों ने उनके लिए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किए।






