सरकार ने सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए ऋण गारंटी योजना-2.0 (सीजीएसएमएफआई-2.0) शुरू की

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भारत सरकार ने सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए ऋण गारंटी योजना-2.0 (सीजीएसएमएफआई-2.0) शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) के माध्यम से बैंकों/वित्तीय संस्थानों को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एनबीएफसी-एमएफआई) और लघु वित्त संस्थानों द्वारा छोटे उधारकर्ताओं को दिए गए ऋण पर अपेक्षित नुकसान के विरुद्ध गारंटी प्रदान करना है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • पात्र उधारकर्ता: भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित सूक्ष्म वित्त की नियामक परिभाषा के अंतर्गत आने वाले मौजूदा या नए छोटे उधारकर्ता।
  • गारंटी कवरेज: छोटे एनबीएफसी-एमएफआई/एमएफआई के लिए डिफ़ॉल्ट राशि का 80%, मध्यम के लिए 75% और बड़े एनबीएफसी-एमएफआई/एमएफआई के लिए 70%।
  • गारंटी शुल्क: स्वीकृत राशि पर 0.50% प्रति वर्ष (पहले वर्ष) और बकाया राशि पर (उसके बाद)।
  • ब्याज दर: एमएलआई द्वारा एनबीएफसी-एमएफआई या एमएफआई को दिए गए ऋणों पर ईबीएलआर या एमसीएलआर + 2% प्रति वर्ष तक सीमित है। छोटे उधारकर्ताओं को ऋण देते समय, ये ऋणदाता ब्याज दर को पिछले 6 महीनों में औसत ऋण दर से 1% कम तक सीमित रखेंगे।
  • यह योजना 30.06.2026 तक या 20,000 करोड़ रुपये तक के ऋणों की गारंटी होने तक, जो भी पहले हो, मान्‍य है।

प्रभाव:

यह योजना एमएफआई क्षेत्र में ऋण प्रवाह को बढ़ाने में सहायक होगी। अनुमान है कि इस योजना से एनबीएफसी-एमएफआई/एमएफआई द्वारा लगभग 36 लाख छोटे उधारकर्ताओं को ऋण देने में सुविधा होगी।

पृष्ठभूमि:

आर्थिक रूप से सबसे निचले पायदान पर मौजूद लोगों को ऋण उपलब्ध कराकर सूक्ष्म वित्त वित्तीय समावेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एनबीएफसी-एमएफआई और एमएफआई सूक्ष्‍म वित्त ऋण व्यवसाय में प्रमुख भागीदार हैं। सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में चल रहे वित्तीय संकट को देखते हुए, बैंकों द्वारा लघु वित्त संस्थानों को ऋण देने में कमी आई है, जिसके कारण छोटे लघु वित्त संस्थानों को ऋण प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। इस योजना का उद्देश्य ऋण देने वाली संस्थाओं को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित सूक्ष्म वित्त की नियामक परिभाषा के अंतर्गत छोटे उधारकर्ताओं को ऋण देने के लिए एनबीएफसी-एमएफआई या एमएफआई को निधि उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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