भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (टीईपीए) 1 अक्टूबर 2025 को प्रभावी होगा। इस समझौते पर 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे । टीईपीए एक आधुनिक और महत्वाकांक्षी समझौता है। यह भारत द्वारा हस्ताक्षरित किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में पहली बार निवेश और रोजगार सृजन से जुड़ी प्रतिबद्धता को शामिल करता है।
इस समझौते में 14 अध्याय हैं। इनमें मुख्य रूप से वस्तुओं से संबंधित बाजार पहुंच, उत्पत्ति के नियम, व्यापार सुविधा, व्यापार उपाय, स्वच्छता और पादप स्वच्छता के उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधाएं, निवेश प्रोत्साहन, सेवाओं पर बाजार पहुंच, बौद्धिक संपदा अधिकार, व्यापार और सतत विकास तथा अन्य कानूनी और क्षैतिज प्रावधानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
टीईपीए के अंतर्गत ईएफटीए की बाज़ार पहुंच पेशकश में 100 प्रतिशत गैर-कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों (पीएपी) पर टैरिफ रियायत शामिल है। फार्मा , चिकित्सा उपकरण और प्रसंस्कृत खाद्य आदि क्षेत्रों में पीएलआई से संबंधित संवेदनशीलता को प्रस्ताव देते समय ध्यान में रखा गया है।
यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं से आगे बढ़कर निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इसका उद्देश्य अगले 15 वर्षों में भारत में 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ाना तथा ऐसे निवेशों के माध्यम से भारत में 1 मिलियन प्रत्यक्ष रोजगार के सृजन को सुगम बनाना है।
समझौते की मुख्य विशेषताएं:
ईएफटीए एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय समूह है। इसके पास वस्तुओं और सेवाओं के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाने के कई अवसर हैं। ईएफटीए यूरोप के तीन (अन्य दो – यूरोपीय संघ और ब्रिटेन) आर्थिक समूहों में से एक महत्वपूर्ण समूह है। ईएफटीए देशों में, स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, उसके बाद नॉर्वे है।
टीईपीए भारत के निर्यातकों को विशिष्ट इनपुट तक पहुंच प्रदान करके सशक्त बनाएगा और अनुकूल व्यापार एवं निवेश वातावरण तैयार करेगा। इससे भारत में निर्मित वस्तुओं के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और साथ ही सेवा क्षेत्र को और अधिक बाज़ारों तक पहुंच के अवसर मिलेंगे।
निवेश और रोज़गार प्रतिबद्धताएं
टीईपीए के अनुच्छेद 7.1 के अनुसार, ईएफटीए सदस्य देशों का लक्ष्य समझौते के लागू होने के 10 वर्षों के भीतर अपने निवेशकों से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना और उसके बाद के 5 वर्षों में अतिरिक्त 50 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी 15 वर्षों में कुल 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना होगा। साथ ही, ईएफटीए सदस्य देशों का लक्ष्य इन निवेश प्रवाहों के परिणामस्वरूप भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोज़गारों के सृजन को सुगम बनाना होगा।
इस निवेश प्रतिबद्धता में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। साथ ही उत्पादक क्षमता निर्माण के लिए दीर्घकालिक पूंजी पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच
ईएफटीए ने टीईपीए के तहत भारत के 99.6 प्रतिशत निर्यात को कवर करते हुए 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों की पेशकश की है। इसमें 100 प्रतिशत गैर-कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों (पीएपी) पर टैरिफ रियायतें शामिल हैं।
ईएफटीए को भारत की पेशकश 82.7 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कवर करती है, जो ईएफटीए निर्यात का 95.3 प्रतिशत है। इन आयातों में से 80 प्रतिशत से अधिक सोना है, और सोने पर प्रभावी शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित किया गया है। इनमें फार्मा, चिकित्सा उपकरण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, डेयरी, सोया, कोयला और संवेदनशील कृषि उत्पाद शामिल हैं।
सेवाओं और गतिशीलता को बढ़ावा:
भारत ने 105 उप-क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं पेश की हैं। इसके अतिरिक्त, ईएफटीए प्रतिबद्धताएं 128 (स्विट्जरलैंड), 114 (नॉर्वे), 107 (लिकटेंस्टीन), 110 (आइसलैंड) हैं। टीईपीए नर्सिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और वास्तुकला जैसी व्यावसायिक सेवाओं में पारस्परिक मान्यता समझौतों को सक्षम बनाता है।
टीईपीए आईटी, व्यावसायिक सेवाओं, सांस्कृतिक और मनोरंजक सेवाओं, शिक्षा और दृश्य-श्रव्य सेवाओं में मजबूत अवसर प्रस्तुत करता है।
बेहतर पहुंच के माध्यम से : मोड 1: सेवाओं की डिजिटल डिलीवरी, मोड 3: वाणिज्यिक उपस्थिति और मोड 4: प्रमुख कर्मियों के प्रवेश और अस्थायी प्रवास के लिए अधिक निश्चितता है।
बौद्धिक संपदा अधिकार
टीईपीए ट्रिप्स स्तर पर बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) की प्रतिबद्धताओं को सुनिश्चित करता है। स्विट्जरलैंड के साथ आईपीआर अध्याय में बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के उच्च मानक हैं, जो सुदृढ़ बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) व्यवस्था को दर्शाता है। जेनेरिक दवाओं में भारत की रुचि और पेटेंट के सदाबहार उपयोग से संबंधित चिंताओं का पूरी तरह से समाधान किया गया है।
सतत एवं समावेशी विकास
टीईपीए सतत विकास, समावेशी वृद्धि, सामाजिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देता है। यह व्यापार प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता, सरलीकरण, सामंजस्य और एकरूपता को बढ़ावा देगा।
रोजगार, कौशल और प्रौद्योगिकी सहयोग
टीईपीए भारत में अगले 15 वर्षों में भारत के युवा आकांक्षी कार्यबल के लिए बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन में तेजी लाएगा, जिसमें व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण की बेहतर सुविधाएं शामिल हैं। टीईपीए सटीक इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा, नवाचार और अनुसंधान एवं विकास में विश्व की अग्रणी तकनीकों तक प्रौद्योगिकी सहयोग और पहुंच को भी सुविधाजनक बनाता है।
टीईपीए के तहत क्षेत्रवार लाभ
भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता उद्योगों की एक विस्तृत श्रृंखला में अवसरों को बढ़ाता है। ईएफटीए की पेशकश में 92 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को कवर करने के साथ, मशीनरी, कार्बनिक रसायन, वस्त्र और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातक टीईपीए के माध्यम से ईएफटीए बाजारों तक काफी बेहतर पहुंच हासिल कर लेंगे ।
कृषि और संबद्ध वस्तुएं
- ईएफटीए को भारत का निर्यात केंद्रित है, और 2024-25 में निर्यात बास्केट में ग्वार गम का हिस्सा 70 प्रतिशत से अधिक होगा। अन्य निर्यातों में प्रसंस्कृत सब्जियां, बासमती चावल, दालें, ताजे फल, अनाज से बनी चीज़ें और अंगूर शामिल हैं।
- नॉर्वे और स्विटजरलैंड मिलकर भारत के ईएफटीए को कृषि निर्यात का 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा निर्यात करते हैं।
- 2024 में ईएफटीए को भारत का निर्यात 72.37 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो ईएफटीए के कुल आयात का 0.41 प्रतिशत था। इस समझौते से टैरिफ बाधाओं में कमी आने और प्रमुख वस्तुओं में भारत की हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है।
- अपेक्षित लाभ : व्यापार पैटर्न और एफटीए टैरिफ रियायतों के आधार पर निम्नलिखित श्रेणियां भारत के लिए उच्च अवसर वाले क्षेत्र हैं-
- प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद – बिस्कुट, कन्फेक्शनरी, चॉकलेट, माल्ट अर्क, सॉस और विविध खाद्य तैयारियां।
- चावल (बासमती और गैर-बासमती) – टैरिफ उन्मूलन से इटली, थाईलैंड और पाकिस्तान के विरुद्ध प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
- ग्वार गम और दालें – यहां पहले से ही भारत की मजबूत उपस्थिति है। एफटीए से बाजार का बड़ा हिस्सा सुरक्षित हो जाएगा।
- ताजे अंगूर, आम, सब्जियां और बाजरा – टैरिफ रियायतें बाजार में प्रवेश और स्थिति में सुधार करती हैं।
- काजू गिरी और अन्य मेवे – ईएफटीए में मांग बड़ी है और भारत निर्यात बढ़ा सकता है।





