भारत सरकार ने देश में समग्र एआई पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए 10,372 करोड़ रुपये के व्यय के साथ इंडियाएआई मिशन की शुरुआत की है। भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लोकतंत्रीकरण एवं कंप्यूटिंग क्षमता विस्तार के प्रयासों के साथ-साथ डेटा केंद्रों और क्लाउड अवसंरचना का तीव्र विकास होने के कारण, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) सहित उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग संसाधनों की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत, एआई कंप्यूटिंग पोर्टल के माध्यम से सामान्य कंप्यूटिंग सुविधा के लिए 38 हजार से अधिक जीपीयू को शामिल किया गया है, जिन्हें भारतीय स्टार्टअप एवं शैक्षणिक संस्थानों को किफायती दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। जीपीयू अत्याधुनिक उपकरण हैं और इनका निर्माण मुख्य रूप से एक ही देश में होता है।
इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत कुल 190 परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इनमें से 78 परियोजनाएं सरकारी संस्थाओं के साथ, 46 परियोजनाएं स्टार्टअप एवं एमएसएमई के साथ, 30 परियोजनाएं प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप के साथ, 27 परियोजनाएं शोधकर्ताओं या शिक्षाविदों के साथ, 5 परियोजनाएं छात्रों के साथ और 4 परियोजनाएं प्रारंभिक चरण के शोधकर्ताओं के साथ हैं।
एचपीसी (हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग) और एआई में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए, प्रोसेसर, जीपीजीपीयू (जनरल-पर्पस ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) और एक्सेलेरेटर के डिजाइन एवं विकास के लिए, एनएसएम (राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन) के अंतर्गत परियोजनाएं शुरू की गई हैं जो आरआईएससी-वी ओपन-सोर्स इंस्ट्रक्शन सेट आर्किटेक्चर पर आधारित हैं।
माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 10 सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी प्रदान की गई है। इनमें से 1 इकाई से वाणिज्यिक उत्पादन और 3 इकाइयों से प्रायोगिक उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड (टीईपीएल) द्वारा गुजरात में 91,526 करोड़ रुपये के निवेश से एक सेमीकंडक्टर फैब सुविधा स्थापित की जा रही है। लक्षित प्रौद्योगिकी नोड्स 110 एनएम से 28 एनएम तक हैं, जिसकी प्रस्तावित कुल क्षमता 50,000 वेफर स्टार्ट्स प्रति माह (डब्ल्यूएसपीएम) है।
सरकार डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई) योजना के माध्यम से सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमताओं को बढ़ावा दे रही है, जिसका उद्देश्य घरेलू कंपनियों, स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई को सेमीकंडक्टर आईपी कोर, एएसआईसी (एप्लिकेशन-स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड सर्किट), एसओसी (सिस्टम ऑन चिप) और सेमीकंडक्टर-लिंक्ड डिजाइन तैयार करने में सहायता प्रदान करना है। यह सहायता तीन स्तरीय संरचना के माध्यम से प्रदान की जाती है, जिसमें शामिल हैं:
- ईडीए टूल्स, आईपी कोर, एमपीडब्ल्यू सेवाओं और प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं तक पहुंच के साथ डिजाइन इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट;
- उत्पाद डिज़ाइन लिंक्ड प्रोत्साहन, पात्र परियोजना लागत के 50 प्रतिशत तक की प्रतिपूर्ति प्रदान करता है, जो प्रति आवेदन 15 करोड़ रुपये तक सीमित है; और
- तैनाती लिंक्ड प्रोत्साहन, जो पांच वर्षों में 6 प्रतिशत से 4 चार प्रतिशत तक शुद्ध बिक्री कारोबार की प्रतिपूर्ति प्रदान करता है, जो प्रति आवेदन 30 करोड़ रुपये तक सीमित है।
डीएलआई योजना के अंतर्गत:
- वीडियो निगरानी, ड्रोन डिटेक्शन, ऊर्जा मीटरिंग, माइक्रोप्रोसेसर, उपग्रह संचार, ब्रॉडबैंड और आईओटी एसओसी जैसे क्षेत्रों के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स और एसओसी के डिजाइन के लिए 24 परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है। इनमें से 14 कंपनियों ने अपने समाधानों को बड़े पैमाने पर विकसित करने एवं उत्पाद रूप देने के लिए वेंचर कैपिटल फंडिंग जुटाई है।
- 103 फैबलेस चिप डिजाइन कंपनियों को उन्नत चिप डिजाइन अवसंरचना तक पहुंच प्रदान करके सहायता दी गई है।
- 16 डिज़ाइनों में से 7 चिप्स को कई फाउंड्रीज में टेप आउट करने के बाद सफलतापूर्वक तैयार किया गया है, जिसमें टीएसएमसी पर 12 एनएम जैसी उन्नत नोड्स भी शामिल हैं।
- 10 पेटेंट दायर किए गए हैं, और 140 से अधिक पुन: प्रयोज्य सेमीकंडक्टर आईपी कोर विकसित किए गए हैं, जो उन्नत चिप डिजाइन के लिए महत्वपूर्ण सहायक के रूप में कार्य करते हैं।
यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में दी।





