एनएचएआई और डब्ल्यूआईआई के अध्ययन में दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे पर वन्यजीव संरक्षण उपायों की प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला गया है

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पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के सतत, समावेशी और सफल विकास का उदाहरण पेश करते हुए, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के साथ मिलकर ‘लैंडस्केप्स रीकनेक्टेड’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में डब्ल्यूआईआई ने दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे पर स्थापित अंडरपास का उपयोग कर रहे वन्यजीवों का पहला प्रमाण प्रस्तुत किया है। यह गलियारा स्थायी अवसंरचना विकास का एक आदर्श उदाहरण है, जो यह प्रदर्शित करता है कि राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण पारिस्थितिक संरक्षण के साथ भी संभव है। इस अध्ययन में वन्यजीव संरक्षण उपायों के प्रभावों पर आधारित एक व्यवस्थित और प्रमाणिक निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया है।

गणेशपुर और आशारोड़ी के बीच दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के 18 किलोमीटर लंबे हिस्से पर किए गए इस अध्ययन का उद्देश्य वन्यजीवों द्वारा अंडरपास के उपयोग के तरीके, विभिन्न वन्य प्रजातियों द्वारा अंडरपास के उपयोग को प्रभावित करने वाले कारकों और अंडरपास की प्रभावशीलता का आकलन करना था। यह वन क्षेत्र बाघ, हाथी, ग्रेटर हॉर्नबिल और किंग कोबरा जैसी कुछ लुप्तप्राय प्रजातियों का निवास स्थान है। गणेशपुर और आशारोड़ी के बीच 20 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में कुल 10.97 किलोमीटर लंबा अंडरपास है जिसे विशेष रूप से पशुओं की निर्बाध आवाजाही को सुगम बनाने के लिए तैयार किया गया है। इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, जिसमें एशिया के सबसे बड़े वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर में से एक को शामिल किया गया है। इसकी औसत ऊंचाई 6 से 7 मीटर रखी गई है, जिससे बड़े से बड़े स्तनधारी सहजता से गुजर सकें।

इस अध्ययन क्षेत्र को रणनीतिक रूप से तीन अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित किया गया था। जोन I में गणेशपुर और मोहंद के बीच 5.43 किलोमीटर लंबा क्षेत्र शामिल था, जोन II मोहंद बस्ती से आशारोड़ी पुलिस चेक पोस्ट तक 9.80 किलोमीटर लंबा क्षेत्र था और जोन III आशारोड़ी पुलिस चेक पोस्ट से दून घाटी में मोहबेवाला तक 3.14 किलोमीटर तक फैला हुआ था। इसमें शिवालिक पर्वतमाला में समतल नदी तल, पहाड़ी भूभाग और साल के जंगलों के मिश्रित क्षेत्र शामिल थे।

इस अध्ययन में दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे पर लगाए गए 150 उच्च-तकनीकी कैमरा ट्रैप और 29 ऑडियोमॉथ ध्वनिक रिकॉर्डर का उपयोग करते हुए 40-दिवसीय निगरानी कार्यक्रम शामिल था। अध्ययन में मनुष्यों, पालतू जानवरों और वन्यजीवों की कुल 111,234 तस्वीरें दर्ज की गईं। इनमें से 40,444 तस्वीरें अंडरपास का उपयोग करने वाली 18 विशिष्ट वन्य प्रजातियों से संबंधित थीं, जिनमें विभिन्न मांसाहारी, शाकाहारी, खुर वाले जानवर, तीतर और बंदर शामिल थे। सबसे अधिक बार गोल्डन जैकाल की तस्वीरें ली गईं। इसके बाद नीलगाय, सांभर और चित्तीदार हिरण का स्थान रहा। भारतीय खरगोश सहित छोटे स्तनधारियों ने भी संरचनाओं के माध्यम से लगातार आवागमन किया। विशेष रूप से, अध्ययन में हाथियों द्वारा गलियारों का सुरक्षित रूप से उपयोग करने के 60 उदाहरण भी दर्ज किए गए। इससे यह पता चलता है कि सबसे बड़े वन्य जानवर भी अपने प्राकृतिक प्रवास शैली को बनाए रखने के लिए नई संरचना में आसानी से चल सकते हैं।

इस शोध में ध्वनि परिदृश्य के रणनीतिक प्रबंधन को गलियारे में वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को सहज और प्रवाहमान बनाने वाले प्रमुख कारक के रूप में चिन्हित किया गया है। आंकड़ों से पता चलता है कि जहां सुनहरे सियार और जंगली सूअर जैसी सामान्य प्रजातियां यातायात के तेज शोर के अनुकूल हो गई हैं, वहीं हाथी और चित्तीदार हिरण जैसी संवेदनशील प्रजातियां कम ध्वनि स्तर वाले अंडरपास खंडों का चयन करके इनका उपयोग करती हैं। उच्च आवृत्ति वाले क्रॉसिंग क्षेत्रों में लक्षित ध्वनि अवरोधकों सहित उन्नत ध्वनि न्यूनीकरण रणनीतियों को लागू करने से ध्वनि के प्रति संवेदनशील प्रजातियों के लिए आवागमन और भी सुगम हो जाएगा।

दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे के विकास से न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना काफी हद तक कम हुई है, बल्कि शिवालिक क्षेत्र में आबादी के अलगाव का खतरा भी कम हुआ है। इस अध्ययन यह सिद्ध होता है कि योजनाबद्ध तरीक से अपनाए गए अवसंरचनात्मक उपाय, जैसे अंडरपास और एलिवेटेड कॉरिडोर, न केवल वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को संरक्षित करने में मदद करते हैं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और संपर्क को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

एनएचएआई राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के साथ पर्यावरणीय स्थिरता को शामिल करने के लिए समर्पित है और बुनियादी ढांचे के विकास को पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के साथ संतुलित करने के लिए, डेटा-संचालित दृष्टिकोण सहित नई शमन रणनीतियों और उपायों को लागू करना जारी रखा जाएगा।

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