पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज अरुणाचल प्रदेश की ग्लॉ झील (Glaw Lake) को भारत की 101वीं रामसर साइट घोषित करने की घोषणा की। यह राज्य के लिए अपनी पहली रामसर साइट पाने का एक अहम पड़ाव है। ‘X’ पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में, मंत्री ने इस घटनाक्रम को जैव विविधता संरक्षण, जल और जलवायु सुरक्षा तथा टिकाऊ आजीविका की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत के रामसर नेटवर्क के शानदार विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “2014 में 26 रामसर साइट्स से लेकर आज 101 तक का यह शानदार सफर पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और टिकाऊ विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” मंत्री ने आगे इस बात पर जोर दिया कि हर नई रामसर साइट प्रकृति की रक्षा करने और साथ ही इन महत्वपूर्ण इकोसिस्टम पर निर्भर समुदायों के हितों की सुरक्षा करने के भारत के संकल्प को और मजबूत करती है।
इस उपलब्धि का जश्न मनाते हुए मंत्री ने कहा, “भारत रामसर साइट्स को नामित करने के मामले में 100 का आंकड़ा पार कर आगे बढ़ रहा है।” ग्लॉ झील के जुड़ने से भारत में रामसर साइट्स की संख्या 101 हो गई है, जो देश की अपनी अमूल्य वेटलैंड (आर्द्रभूमि) इकोसिस्टम को संरक्षित करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कामलांग टाइगर रिजर्व और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में स्थित, ग्लॉ झील पूर्वी हिमालय में एक साफ पानी वाली झील और जैव विविधता का हॉटस्पॉट है। इस झील में पहाड़ों से निकलने वाली बारहमासी जलधाराओं से पानी आता है और यह घनी वनस्पति से घिरी हुई है, जो समृद्ध वनस्पति विविधता को सहारा देती है। मंत्री ने बताया कि इस वेटलैंड और इसके कैचमेंट एरिया में 150 से अधिक पेड़ की प्रजातियां और 49 ऑर्किड प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जो ग्लॉ झील और इसके आसपास के इलाके के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करती हैं।





