भारत और योग का नाता सहस्राब्दियों पुराना है। भारत की प्राचीन परंपराओं पर आधारित योग एक आध्यात्मिक और दार्शनिक परिपाटी से आगे बढ़ते हुए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक आरोग्य के वैश्विक आंदोलन में तब्दील हो गया है।
संयुक्तराष्ट्र ने इसके सार्वभौमिक आकर्षण और लाभों को मान्यता देते हुए 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। इस संबंध में प्रस्ताव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्तराष्ट्र से 69वें अधिवेशन में पेश किया। इस प्रस्ताव का 175 सदस्य देशों ने समर्थन किया। पहला आईडीवाई 21 जून 2015 को मनाया गया। यूनेस्को ने 2016 में योग को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की अपनी प्रतिनिधि सूची में शामिल किया।
यह युगांतरकारी मान्यता वैश्विक आरोग्य में भारत के योगदान को रेखांकित करती है। यह योग की यात्रा को एक नई ऊंचाई पर ले जाकर इसे सभी महाद्वीपों तक फैले वैश्विक समारोह में तब्दील करती है। तब से आईडीवाई के आयोजन ने राष्ट्रों के बीच स्वास्थ्य, सौहार्द और संवहनीय जीवन शैली को बढ़ावा देने वाले सेतु के रूप में योग की भूमिका को मजबूत किया है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को देश भर में हजारों आयोजनों के जरिए मनाया जाता है। लेकिन इसका मुख्य आयोजन हर साल एक अलग शहर में किया जाता है। मुख्य आयोजन की शुरुआत 2015 में नई दिल्ली के राजपथ से हुई थी। इसके बाद इसे चंडीगढ़, लखनऊ, देहरादून, रांची, मैसूरू, जबलपुर, श्रीनगर और विशाखापत्तनम में आयोजित किया जा चुका है।
11 आयोजनों के दौरान, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एक वैश्विक आयोजन से बदलकर निवारक स्वास्थ्य देखभाल, स्वस्थ जीवन और आंतरिक संतुलन के लिए एक जन-आंदोलन बन चुका है। आज, इसे 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: इस वर्ष क्या हो रहा है
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का 12वां आयोजन 21 जून 2026 को मनाया जा रहा है और इस बार मुख्य राष्ट्रीय कार्यक्रम की मेजबानी कोलकाता कर रहा है। इस वर्ष की थीम, ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ है जो विश्व भर में जीवन भर स्वस्थ और सक्रिय जीवन जीने पर ध्यान देने पर जोर देती है। जैसे-जैसे दुनिया भर में बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है और गैर-संचारी रोग व जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, ध्यान केवल जीवन के साल बढ़ाने से हटकर स्वस्थ रहने की अवधि, जीवन की गुणवत्ता और समग्र कल्याण को बेहतर बनाने पर केंद्रित हो रहा है।
योग के माध्यम से स्वस्थ आयु की आधारशिला
स्वस्थ आयु का मतलब अब यह माना जाता है कि जीवन भर काम करने की क्षमता, चलने-फिरने की शक्ति, दिमागी सेहत और सामाजिक मेलजोल बनाए रखा जाए। इस ढांचे के भीतर, योग एक बहुआयामी अभ्यास के रूप में सामने आता है जो शारीरिक गतिविधि, श्वास नियंत्रण और सचेतनता को एक साथ जोड़ता है। ताड़ासन और त्रिकोणासन जैसे अभ्यास शरीर के पोस्चर और लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे लंबे समय तक बैठने के दुष्प्रभावों को दूर किया जा सकता है। भुजंगासन और मकरासन रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य और विश्राम को बढ़ावा देते हैं; जबकि अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम जैसे श्वसन अभ्यास श्वास के प्रति जागरूकता और मानसिक शांति को बढ़ाते हैं। ध्यान, एकाग्रता और मानसिक स्थिति को और अधिक मजबूत करने में मदद करता है। इस प्रकार, ये सभी अभ्यास मिलकर स्वस्थ आयु के कई ज़रूरी पहलुओं में मदद करते हैं।
21 जून 2026 की तैयारी
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियाँ देशव्यापी कार्यक्रमों की एक श्रृंखला के माध्यम से काफी समय पहले ही शुरू हो गई थीं। इस वर्ष के आयोजनों की औपचारिक शुरुआत करते हुए, 13 मार्च 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन से 100-दिवसीय काउंटडाउन का शुभारंभ किया गया। इसके बाद महाराष्ट्र के लोनार में 75-दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम और हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में 50-दिवसीय काउंटडाउन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इनमें से प्रत्येक कार्यक्रम ने ‘कॉमन योग प्रोटोकॉल’ के लिए हजारों प्रतिभागियों को एक साथ लाकर सामूहिक भागीदारी के संदेश को मजबूत किया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों के दौरान एक बहुत बड़ी उपलब्धि भी हासिल की गई। 14 जून को आयोजित एक विशेष देशव्यापी लाइव योग सत्र में चार लाख से अधिक लोगों ने एक साथ जुड़कर भाग लिया, जिससे एक नया गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना।
इन आयोजनों को भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से भी जोड़ा गया है। खजुराहो के स्मारकों के समूह में हुए 25-दिन के काउंटडाउन कार्यक्रम में योग को प्रतिष्ठित विरासत स्थलों के साथ जोड़ा गया। इन कार्यक्रमों के साथ-साथ सरकार ने ‘100 दिन, 100 शहर, 100 संगठन’ अभियान भी शुरू किया। इसने देश भर के संस्थानों और समुदायों को योग को रोज़मर्रा की ज़िंदगी का नियमित हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है।





