भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) ने विशाखापत्तनम स्थित आंध्र विश्वविद्यालय (एयू) में एक कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड (सी-एआरटी) की स्थापना की है। आंध्र विश्वविद्यालय ने अपने परिसर में एक खुली मौसम विज्ञान वेधशाला स्थापित करने हेतु भूमि आवंटित की है, जिससे निरंतर और एकीकृत अवलोकन एवं अनुसंधान संबंधी सहयोग संभव हो सकेगा।
कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड (सी-एआरटी) की खुली वेधशाला का उद्घाटन 1 मई 2026 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन द्वारा माननीय कुलपति प्रोफेसर जी.पी. राजा शेखर और आईआईटीएम के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की मिशन मौसम पहल के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसका उद्देश्य अवलोकन संबंधी नेटवर्क और मॉडल पूर्वानुमान को बढ़ाना है।
इस समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि एमओईएस के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, सम्मानित अतिथि आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जी.पी. राजा शेखर, आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव, एयू के मौसम विज्ञान एवं समुद्र विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर सी.वी. नायडू, एयू के प्राचार्य प्रोफेसर एमवीआर राजू और आईआईटीएम की परियोजना निदेशक डॉ. बी. पद्मा कुमारी के स्वागत के साथ हुई।
आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए. सूर्यचंद्र राव ने स्वागत भाषण दिया। अपने भाषण में, उन्होंने आईआईटीएम की अनुसंधान संबंधी गतिविधियों और पूर्वी तट पर स्थित विशाखापत्तनम में कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड की स्थापना के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने एयू में मौसम विज्ञान एवं समुद्र विज्ञान विभाग में उपकरणों की स्थापना के पहले चरण और कोस्टल रिसर्च टेस्टबेड के अंतर्गत आने वाले अत्याधुनिक रिमोट सेंसिंग, प्रोफाइलिंग और यथास्थान उपकरणों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी।
एमओईएस के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने “कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड” पर एक विवरण पुस्तिका जारी की। इस पुस्तिका में अनुसंधान संबंधी उद्देश्यों, कार्यान्वयन की रणनीति, संस्थागत सहयोग, उन्नत मौसम संबंधी उपकरणों और क्षेत्रीय प्रभाव का विवरण दिया गया है। उन्होंने विशाखापत्तनम स्थित “कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड” से संबंधित एक लघु फिल्म भी जारी की।
एयू के माननीय कुलपति प्रोफेसर जी. पी. राजा शेखर ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विशाखापत्तनम में इस रिसर्च टेस्टबेड की स्थापना में एयू और आईआईटीएम के संयुक्त प्रयास कितने महत्वपूर्ण रहे। यह केन्द्र आईआईटीएम और एयू के बीच दीर्घकालिक वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
माननीय सचिव एम. रविचंद्रन ने मिशन मौसम के तहत वर्तमान अवलोकन क्षमता (स्थानिक और सामयिक सहित) में सुधार लाने हेतु एमओईएस की योजनाओं एवं पहलों पर जोर दिया, ताकि मौसम संबंधी सभी स्थितियों, विशेष रूप से गंभीर मौसम की निगरानी की जा सके और बेहतर मौसम पूर्वानुमान में सहायता मिल सके। उन्होंने एमओईएस के संस्थानों और राज्यों के विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया।
इस टेस्टबेड से पहली बार अवलोकन करने के उपलक्ष्य में, एमओईएस के सचिव, एयू के कुलपति और आईआईटीएम के निदेशक द्वारा एक मौसम संबंधी गुब्बारे का प्रक्षेपण किया गया। इस स्थल पर इम्पैक्ट डिसड्रोमीटर, 2-डायमेंशनल वीडियो डिसड्रोमीटर (2डीवीडी), 3डी प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (3डी-पीएडब्ल्यूएस), कन्वेक्शनल एडब्ल्यूएस और एडी कोवेरियंस टावर जैसे अन्य उपकरण भी स्थापित हैं। इन उपकरणों ने विशाखापत्तनम में आज हुई पहली गरज के साथ बारिश के माप दर्ज किए। ये उपकरण बूंदों के आकार एवं आकृति सहित उनके आकार के वितरण, वर्षा की सूक्ष्म भौतिकी, अशांति प्रवाह और हवा की जानकारी की उच्च-रिजॉल्यूशन वाली निगरानी में सक्षम बनाएंगे – जो प्रक्रिया की समझ को बेहतर बनाने और संख्यात्मक मॉडलों में उनके प्रतिनिधित्व के लिए महत्वपूर्ण है।
इस टेस्टबेड के लिए भविष्य में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों में स्कैनिंग विंड लिडार, पोलारिमेट्रिक क्लाउड एवं प्रेसिपिटेशन डॉप्लर रडार, फेज एरे रडार, प्रोटॉन ट्रांसफर रिएक्शन मास स्पेक्ट्रोमीटर शामिल होंगे, जो न केवल हमें वायुमंडल को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे बल्कि चरम स्थितियों का अधिक सटीक पूर्वानुमान लगाने में भी सहायक होंगे।
यह कोस्टल एटमॉस्फेरिक रिसर्च टेस्टबेड (सी-एआरटी) मानसून संवहन के प्रक्रिया-स्तरीय निदान में सहायता हेतु अनुसंधान संबंधी अवलोकन प्रदान करने, संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडलों में पैरामीटराइजेशन योजनाओं को बेहतर बनाने, पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाने और मॉडल मूल्यांकन के लिए डेटा एसिमिलेशन प्रयोगों को सक्षम करने हेतु एक राष्ट्रीय उपयोगकर्ता सुविधा के रूप में कार्य करेगा। इससे चक्रवातों और चरम मौसमों के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बेहतर बनाने और आपदा प्रबंधन में सहायता प्राप्त करने में मदद मिलेगी।





